Be Careful While Choosing Your Friends

हेलो दोस्तों कैसे है आप? सच बताऊ तो आज ब्लॉग लिखने का मन नहीं था। कहने को आज शनिवार है लेकिन काम इतना करवाया जा रहा है की energy ही नहीं बचती। फिर मुझे ये याद आया की मैंने अपने आप से वायदा किया है की हफ्ते में 5 या 6 पोस्ट करनी ही करनी है और अगर मैं खुद से किया वायदा ही न निभा सका तो किसी दूसरे से कोई वायदा कैसे कर पाउँगा। इसीलिए लीजिये मैं हाज़िर हूँ एक और पोस्ट के साथ जहाँ मैं आपको friend circle के बारे में कुछ बताना चाहूंगा।

हममे से बहुत सारे लोग ऐसे होते है जिनके बारे में कहा जाता है की वो बहुत जल्दी दोस्ती कर लेते है। देखिये जान पहचान करने में और दोस्ती करने में बहुत फ़र्क होता है और हमें हमेशा बहुत ध्यान से अपने दोस्तों को चुनना चाहिए। कर्ण ने दुर्योधन को चुना और अर्जुन ने कृष्ण को, नतीजा सब को पता है। कर्ण जानता था की दुर्योधन गलत रास्ते पर है और उसे समझाया भी लेकिन दुर्योधन ने अपने साथ साथ कर्ण का भी नाश करवा दिया। इसीलिए दोस्त बहुत ध्यान से चुनो। मैं आपको एक बात और समझाना चाहूंगा की दुर्योधन ने भले ही स्वार्थ के चलते कर्ण को दोस्त बनाया हो लेकिन कर्ण ने अपनी दोस्ती में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसलिए कर्ण जैसा दोस्त चुनो, दुर्योधन जैसा नहीं।

आज के समय में बहुत सारे लोग या सही सही बताऊ तो 80% लोग आपसे दोस्ती सिर्फ अपने मतलब के लिए करते है और ये बात आपको मालूम भी होगी। आपको पता होगा की किस दोस्त पर आप भरोसा कर सकते है और कौन सा दोस्त ऐसा है जिसे शायद आप कभी अपने घर भी न बुलाये। लेकिन फिर भी अगर आप समझ नहीं पा रहे है की सामने वाला शख़्स आपका अच्छा दोस्त है की नहीं तो कुछ बातों पर ध्यान दे :

  • क्या सामने वाला बंदा आपसे हमेशा किसी दूसरे की बुराई करता रहता है ?
  • क्या सामने वाला बंदा पैसों के मामले दोस्ती से ऊपर रखता है?
  • क्या आपको ऐसा लगता है की सामने वाला बंदा ज़रुरत से ज़्यादा आपसे favors ले रहा है। मतलब हर काम आप से करवा है ?
  • क्या सामने वाला बंदा आपको support करने के बदले ज़्यादातर आपको नया करने से रोकता है बल्कि आपको डराता है ?
  • क्या सामने वाला बंदा आपकी मासूमियत का गलत फ़ायदा उठाता है ?

अगर इन सवालों में से ज़्यादातर के जवाब आप ‘हाँ’ में दे रहे है तो मेरे दोस्त उस बंदे से थोड़ा दूरी बना ले क्यूंकि वो सिर्फ एक Leech यानि जोंक की तरह है जो सिर्फ आपका खून चूस रहा है।

दोस्ती एकलौता ऐसा रिश्ता है जो इंसान खुद बनाता है। इसलिए अपने दोस्त कभी भी जल्दबाज़ी में न चुने। थोड़ा समय दे। ऐसा समझे की जिसे आप दोस्त बनाने वाले है आप उसे अपने जीवन भर की जमा-पूंजी देने वाले है तो क्या सामने वाला शख़्स इस लायक है? क्या वो इस क़ाबिल है की आपके छोटे बच्चे की देखभाल कर सके? अगर नहीं , तो ऐसे इंसान पर अपना समय बर्बाद मत करिये।

मेरे बहुत गिने चुने दोस्त है , कई दोस्त तो ऐसे है जिनसे मैंने सालों से बात नहीं की लेकिन मुझे पूरा यकीन है की अगर मुझे किसी emergency में उनकी ज़रुरत पड़ी तो वो कुछ भी करके मेरी मदद करेंगे। वो दोस्त ही है मेरे अब तक के जीवन की कमाई और उन्ही को dedicated है मेरा यह पोस्ट।

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