The Fault In Our Belief System

हेलो जी कैसे है आप? आज का post एक गंभीर विषय पर है। Belief System यानी मान्यताएँ। जैसे कई लोगो को मनाना है की बिल्ली रास्ता काट जाये तो आगे नहीं जाना चाहिए। दरअसल यह पुराने ज़माने के लोगों की मान्यता थी क्यूंकि उस समय जंगली जानवर गाँव के आस पास आ जाया करते थे खासतौर पर बाघ। तब लोगों ने पैरों के निशान के हिसाब से यह मान्यता बनायीं की अगर बड़ी बिल्ली के पंजो के निशान दिखे तो वहाँ से नहीं जाना चाहिए। यह मान्यता आज भी बिना कुछ सोचे समझे आज भी मानी जाती है जबकि आज के समय में इसका कोई तर्क नहीं है।

हम जन्म से अपना belief system ले कर नहीं आते बल्कि इस दुनिया में आने के बाद अपना खुद का system बनाते है। एक आदमी का belief system चार जगह से आता है। 25% मान्यताएँ वो अपने परिवार से लेता है , जो भी उसके परिवार की मान्यताएँ हो उसके बाद 25% दोस्तों से मिलती है, अगली 25% समाज से लेता और आखिरी की 25% मान्यताएँ वो खुद बनाता है।

मान्यताएँ इंसानी जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है क्यूंकि इसके बिना अच्छी ज़िन्दगी जीना बहुत मुश्किल है। आप हर मान्यता खुद से नहीं बना सकते। और हमारे आस पास का belief system का असर हम पर पड़ता ही है। जो beliefs भारत के नागरिक की होंगी वो अमेरिका के नागरिक की भी हो यह ज़रूरी नहीं। इसलिए सबकी मान्यतऐं अलग अलग है और हमें सब का सम्मान करना चाहिए और यही होती है गड़बड़।

The Fault In Our Belief System के ज़रिये मैं आपको बस एक बात समझाना चाहता हूँ की हम सब की अपनी अपनी मान्यताएँ है और fault ये है की हम अपनी belief को दुसरो से बड़ा समझते है। बड़ा छोटा जैसा कुछ नहीं है, सामने वाले की मान्यताओं का भी सम्मान कीजिये। जिस तरह से आप अपने belief system के साथ बड़े हुए है वैसे ही बाकी लोग भी। अपनी मान्यतओं पर अड़े रह कर आप सिर्फ रिश्ते बिगाड़ेंगे।

इंसान कई मौको पर अपनी मान्यतओं को बदलता है जैसे शादी के बाद। शादी के बाद एक लड़की एक अलग belief system से आकर आपके belief system को अपनाती है , इसकी क़दर कीजिए। दूसरा मौका जब किसी की ज़िन्दगी में कोई बड़ी घटना होती है जैसे कोई accident ऐसी situation में भी लोग अपना मान्यताएँ बदलते है। एक और मौका है जब लोग ऐसा करते है और वो है ग़रीबी। खाली जेब इंसान को बदल कर रख देती है।

अंत में आपसे सिर्फ एक बात कहानी है एक अच्छे इंसान बनिए और सामने वाले की मान्यताओं की क़दर करिये। कुछ लोग हो सकते है जो अपनी बात पर अड़े रहे ऐसे लोगों से ज़्यादा बात करने से कोई फ़ायदा नहीं। यह बदलने वाले नहीं। जब तक उनकी मान्यताएँ आपकी नौतिकता के बीच न आये तब तक ठीक है लेकिन जब वो इनकी आड़ में आपको नुकसान पहुँचाने लगे या फ़ायदा उठाने लगे तो विरोध करिए।

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